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हुआ सवेरा और तितली रानी

हुआ सवेरा
हुआ सवेरा निकला सूरज, शाम को घर को जाएगा। जगमग जगमग चन्दा मामा तारों के सगं आएगा, शाम को घर को जाएगा। जगमग जगमग परियाँ आएगी, अपना अपना नाच दिखाएगी। किरणों के पलने में मुन्ना, आँख मूंद सोजाएगा।

तितली रानी
तितली रानी इतने सुन्दर, पखं कहाँ से लाई हो । क्या तुम कोइ शहजादी हो, परी लोक से आई हो । फूल तुम्हे भी अच्छे लगते हैं। फूल तुम्हे भी भाते है, वो तुमको कैसे लगते हैं, जो फूल तोड़ ले जाते हैं।

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